Tuesday, March 31, 2009
डायवर्सिटी, चुनाव और मायावती का सस्पेंस
चुनाव के पहले की ये मेरी पहली पोस्ट है। अब लगातार लिखने का इरादा है। आज एक लेख आप पढ़िए चुनाव में दलित-वंचित उम्मीदों और आकांक्षाओं के बारे में। इस लेख को लिखने का आइडिया बहुजन डायवर्सिटी मिशन के संस्थापक और चिंतक एच एल दुसाध की बातों से मिला। दुसाध साहब ने 60 से ज्यादा किताबें लिखी हैं। सभी हिंदी में हैं। लेकिन स्वाभाविक कारणों से हिंदी का साहित्य समाज उन्हें नहीं जानता। बहरहाल आप देखें वो लेख जो आज नवभारत टाइम्स के संपादकीय पेज पर छपा है।
Sunday, March 29, 2009
72 साल के बच्चे से रोमांचक मुलाकात, आप भी मिलिए

डब्बूजी का कार्टून कोना याद है। ये अभी भी आता है। लेकिन बहुत लोगों के लिए ये धर्मयुग की यादों से जुड़ी हुई चीज है। बात आबिद सुरती की हो रही है। आज उनसे मिलने का मौका मिला। अनुराधा, मैं और बेटे अरिंदम के लिए ये एक शानदार मौका था और इसके लिए हम अपनी दोस्त फोटोजर्नलिस्ट सर्वेश के शुक्रगुजार हैं।
दोपहर बाद उस समय बूंदाबांदी सी हो रही थी। सर्वेश का निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन के पास अपना फ्लैट है। आबिद से मिलने का न्योता सर्वेश की ओर से ही आया था। हम रेलवे स्टेशन के पास सर्वेश के घर में जैसे ही घुसे सामने दीवान पर बैठा एक दढ़ियल जवान सा बुजुर्ग दिखा। टी शर्ट, नए जमाने की पैंट पहने वो बुजुर्ग थे हमारे बचपन के दिनों के साथी आबिद सुरती। हालांकि अपने इस दोस्त से ये पहली मुलाकात थी, लेकिन ऐसा लगा मानों हम तो हमेशा मिलते रहे हैं।
बहरहाल हमने जमकर उनके साथ गप्पे लड़ाईं। साथ मे चाय पी गई। पता चला कि चंद दिनों में 75 के होने जा रहे हैं आबिद सुरती। इस उम्र में उनकी सक्रियता और क्रिएटिविटी और सबसे बढ़कर नया और मॉडर्न सीखने की उनकी ललक ने हमें लगभग शर्मिंदा कर दिया। क्या आपको ये जानकर आश्चर्य होगा कि ये शख्स इस उम्र में दुनिया में हो रही हर बड़ी हलचल से वाकिफ है और उन पर अपनी राय रखता है और उसे क्रिएटिव तरीके से जाहिर भी करता है। इस उम्र में आबिद नए सॉफ्टवेयर की ट्रेनिंग ले रहे हैं। हाल ही में उन्होंने गुजराती लोककथाओं (लेखक गिजूभाई बधेका) की सिरीज का अनुवाद किया। उनकी ही प्रस्तुति और रेखांकन के साथ 10 किताबों का ये सेट नेशनल बुक ट्रस्ट से आया है।
उनका एक उपन्य़ास काला गुलाब अब फिल्मकारों की नजर में है और हो सकता है इस पर कोई फिल्म आ जाए। ये किताब दरअसल फिल्म की स्क्रिप्ट भी है।
बहरहाल छोटी सी मुलाकात में कुछ और बातें भी हुईं जो फिर कभी। ये तस्वीर जो आप देख रहे हैं वह अनुराधा ने सर्वेश के घर से मुंबई के लिए आबिद की रवानगी के समय उतारी है।
Posted by
दिलीप मंडल
Labels:
अनछपी बात,
आबिद सुरती,
यादें,
सर्वेश
7 comments:
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9:24 PM
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